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Friday, July 15, 2011

भारत में ख़ुफ़िया तंत्र किसलिए बनाया गया है???

मित्रों एक बार फिर मुंबई दहल गयी| यह तो अब मुंबई के दैनिक जीवन में आदत सी हो गयी है| और मुंबई ही क्यों, अब तो पूरा भारत ही इसे अपनी आदत में शामिल करने वाला है| कितने मरे, कहाँ मरे, कितने घायल हुए, इन बातों पर विचार करना मेरे विचार से अब व्यर्थ की बातें हैं| हम हर बार मरने वालों की संख्या ही गिनते रह जाते हैं और मारने वाले मार कर चले जाते हैं|
विचार करना ही है तो इस बात पर करों कि आखिर कब तक हम भारतीयों को इस वर्णसंकर खच्चरों वाली सरकार की राजनैतिक इच्छाओं की बेदी पर बार बार बम धमाकों में मरना पड़ेगा? क्या हमने यहाँ केवल फटने के लिए ही जन्म लिया है?

By the way खच्चर से याद आया कि, भोदू युवराज राउल विन्ची ने कहा है कि "एक दो हमले तो होंगे ही, हम हर एक हमले को तो रोक नहीं सकते न| पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तो आतंकी हमले रोजमर्रा की बात है|"



शायद विन्ची को इसी बात का इंतज़ार है कि जल्दी ही  भारत के लोगों को भी इन धमाकों की आदत हो जाए| या विन्ची इस बात से तसल्ली किये बैठे हैं कि चलो पाकिस्तान में तो धमाकों में १०० लोग मरते हैं, हमारे यहाँ तो अभी ३५-४० ही मरे हैं|
शायद विन्ची यह चाहता है कि पाकिस्तान में तो लोगों की माँ और बहन दोनों का बलात्कार होता है, किन्तु भारत में यदि केवल बहन का ही बलात्कार हो रहा है तो हम भारतवासियों को तसल्ली कर लेनी चाहिए न कि अपनी बहन को बचाना चाहिए|
शायद विन्ची यह चाहता है कि पाकिस्तान में तो भाई और बाप दोनों की हत्याएं होती हैं, किन्तु भारत में केवल भाई की हो रही है तो हमे इस बात से तसल्ली कर लेनी चाहिए न कि अपने भाई को बचाना चाहिए|


और तो और विन्ची के G.K. का तो जवाब ही नहीं| उसका कहना है कि "अमरीका में भी ऐसे हमले होते रहते हैं|"
पता नहीं सोनिया मम्मी इसे कौनसा ज्ञान देती हैं? ऐसी कौनसी किताबे पढ़ाती हैं कि ऐसा अद्भुत(?) ज्ञान किसी और के पास है ही नहीं?

अब जब शीर्षक से भटककर चर्चा छिड़ ही चुकी है तो बाकियों को भी कटघरे में खड़ा कर लिया जाए|
विन्ची के बाद हमारे गृहमंत्री चिदंबरम साहब(?) का तो कहना ही क्या? उनका कहना है कि "मुंबई कि धरती पर इकत्तीस महीने बाद कोई आतंकी हमला हुआ है|"
मतलब यदि आतंकवादी किसी निश्चित समय अंतराल में यहाँ बम फोड़ते रहें तो यह उचित है| रोज़ रोज़ न सही, कभी कभी तो चलता है|



और दिग्गी की तो बात ही छोडिये| वैसे तो इनकी बात करना ही बेकार है, किन्तु जब ज़िक्र छेड़ ही दिया है तो कदम पीछे हटाने का मन ही नहीं कर रहा|
अभी शायद दो-चार दिन पहले ही इन्होने बयान दिया था कि "जब से प्रज्ञा ठाकुर जेल में है, भारत में एक भी आतंकी कार्यवाही नहीं हुई|"
लो भाई दिग्गी राजा, आपकी यह इच्छा भी पूरी हो गयी| आपको शायद इसी बात का इंतज़ार होगा| अब कहो कि इसमें भी आरएसएस व भाजपा का ही हाथ है|
वैसे यदि कल दिग्गी ऐसा बयान दे भी दे तो कोई आश्चर्य मत करना|

अंत में हमारे आदरणीय(?), माननीय(?), सम्माननीय(?), पूजनीय(?) प्रधानमन्त्री जी श्री श्री.........१००००००००८ मन्दमोहन सिंह जी की भी बारी लगा ही देते हैं|

मेरी पिछली पोस्ट पर आई आदरणीय मदन शर्मा जी की टिपण्णी इस सम्बन्ध में एकदम सटीक बैठती है| उनकी टिपण्णी के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ|
"कैसी है आज की हमारी नकारी सरकार ?
कि मनमोहन सिंह अब भी वही रटा रटाया वाक्य कह रहे हैं की 
कोई हमारे धैर्य की परीक्षा न ले | 
ना जाने कब इनका धैर्य टूटेगा ? क्या चाहते हैं ये? 
हर कोई सब कुछ जानता है फिर भी ये सरकार चुप्पी लगा कर बैठी हुई है |"
मुझे नहीं लगता की मन्दमोहन के विषय में इससे अच्छी कोई टिपण्णी हो सकती है| इससे अधिक तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं है|


खैर अब मुद्दे से बहुत भटक लिए, कांग्रेस व कांग्रेसियों को बहुत गालियाँ दे लीं| इनको कोसते रहे तो पूरी रात निकल जाएगी| अब असली मुद्दे पर आते हैं|
मुद्दा यह है की हमारे देश में ख़ुफ़िया एजेंसियां किसलिए बनाई गयी हैं? इनकी नाक के नीचे मुंबई में तीन धमाके हो गए और इन्हें पता भी नहीं चला|
 पता चले भी तो कहाँ से? ये तो कहीं और व्यस्त थे|

केंद्र सरकार के अनुसार, बाबा रामदेव के आन्दोलन के समय तो सरकार को इन ख़ुफ़िया तंत्रों द्वारा यह जानकारी मिली थी कि दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव व अन्य आन्दोलनकारियों पर आतंकी हमला होने वाला है|
मतलब बाबा रामदेव पर होने वाले आतंकी हमले की जानकारी तो जुटा ली, लेकिन मुंबई में फेल हो गए| सरकार की इस संभावना के पीछे तीन संभावनाएं और छिपी हैं|

१. या तो हमारे ख़ुफ़िया तंत्र केवल हवा में तीर मारते हैं| क्योंकि उनकी दी गयी जानकारी तो गलत ही सिद्ध हुई| न तो बाबा रामदेव के आन्दोलन में कोई आतंकी हमला हुआ जबकि मुंबई में हो गया, जहां की इन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी|
२. या फिर सरकार ने केवल आतंकी हमले का बहाना बनाकर, बाबा रामदेव के आन्दोलन का दमन किया| निर्दोष लोगों को बर्बरता से पीटा और भारत के ख़ुफ़िया तंत्र को यूँही बदनाम किया|
३. या फिर सरकार ने सारे ख़ुफ़िया तंत्रों को बाबा रामदेव के पीछे लगा रखा है| इस कारण मुंबई में होने वाले आतंकी हमलों की कोई सूचना नहीं जुटा पाए| मतलब बाबा रामदेव से अपनी लाज बचाने के लिए दिल्ली में तो निर्दोष आन्दोलनकारियों को तो पीटा ही मुंबई में भी निर्दोष लोग मरवा दिए|

तीनों ही अवस्थाओं में सरकार को कटघरे में लेना चाहिए कि आखिर खुफिया तंत्रों का उपयोग क्या है? किसलिए भारत में ये खुफिया तंत्र खड़े किये गए हैं?


मनमोहन सिंह (इन्हें सरदार कहने में मुझे आपत्ति है) आखिर कब तक आप अपने उत्तरदायित्वों से भागेंगे?
आखिर कब तक आप ये कहेंगे कि मुझे तो कुछ मालुम नहीं, मुझे किसी ने बताया ही नहीं, हम जांच कर रहे हैं, हम कड़ी कार्यवाही करेंगे आदि आदि?
अब आपके जवाब देने की बारी आ गयी है| यदि देश नहीं संभल रहा तो कुर्सी छोड़ देनी चाहिए|
शायद लोगों को यह शंका हो कि मनमोहन सिंह ने यदि प्रधान मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया तो राहुल गांधी को प्रधान मंत्री बना दिया जाएगा|
क्या फर्क पड़ता है? दोनों ही अवस्थाओं में सत्ता तो सोनिया की ही रहनी है|


अब भी यदि भारतवासी भोंदू युवराज को भारत के अगले प्रधानमन्त्री के रूप में देख रहे हैं, तो ये बम धमाकों में ही मरने लायक हैं|
यदि किसी ने आत्महत्या करने की ठान ही ली है तो उसे तो भगवन शिव भी नहीं बचा सकते|



इस लेख को लिखने की प्रेरणा देने के लिए भाई भुवन का आभार...

16 comments:

  1. हर-हर बम-बम
    बम-बम धम-धम |

    थम-थम, गम-गम,
    हम-हम, नम-नम|

    शठ-शम शठ-शम
    व्यर्थम - व्यर्थम |

    दम-ख़म, बम-बम,
    तम-कम, हर-दम |

    समदन सम-सम,
    समरथ सब हम | समदन = युद्ध

    अनरथ कर कम
    चट-पट भर दम |

    भकभक जल यम
    मरदन मरहम ||
    राहुल उवाच : कई देशों में तो, बम विस्फोट दिनचर्या में शामिल है |

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  2. दुश्मनों से बड़ी नरमी
    पकडे गए इन दुश्मनों ने,
    भोज सालों है किया |
    मारे गए उन दुश्मनों की
    लाश को इज्जत दिया ||
    लाश को ताबूत में रख
    पाक को भेजा किये |
    पर शिकायत यह नहीं कि
    आप कुछ बेजा किये ---
    राम-लीला हो रही |
    है सही बिलकुल सही ||

    रेल के घायल कराहें,
    कर्मियों की नजर मैली |
    जेब कितनों की कटी,
    लुट गए असबाब-थैली |
    तृन-मूली रेलमंत्री
    यात्री सब घास-मूली
    संग में जाकर बॉस के
    कर रहे थे अलग रैली |
    राम-लीला हो रही |
    है सही बिलकुल सही ||

    नक्सली हमले में उड़ते
    वाहनों संग पुलिसकर्मी |
    कूड़ा गाडी में ढोवाये,
    व्यवस्था है या बेशर्मी |
    दोस्तों संग दुश्मनी तो
    दुश्मनों से बड़ी नरमी ||
    राम-लीला हो रही |
    है सही बिलकुल सही ||

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  3. राहुल गांधी का वक्तव्य अत्यंत शर्मनाक , बचकाना और गैरजिम्मेदाराना है.

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  4. वैसे भी लोगों को आदत सी हो गई है इनके धैर्य को देखने कि , क्यूंकि लोगों को पता है इनका धैर्य कभी नहीं टूटेगा पर एक आम आदमी कर भी क्या सकता है उसे तो इन लोगों ने दो वक्त कि रोटी के लिए मोहताज कर रखा है, पर जो भी हो जितने भी मरे इनको क्या फर्क पड़ने वाला है ये तो बस इतना कहकर पल्ला छुडा लेंगे कि दोषियों कि तलाश जारी और पकड़े जाने पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही कि जायेगी जैसे कसाब , अफजल गुरु जैसों के साथ कि जा चुकी है, इससे बड़ी सजा कोई हो सकती है इनके सीने में ??
    धन्यवाद दिवस भाई ज्वलंत मुददों पर इन कमीनो का मासूम गंदा चेहरा पेश करने पर, आलेख के लिए शुभकामनाये !

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  5. आतंकियों पर मुझे गुस्सा आना तो मुझे बहुत पहले ही बंद हो गया था अब तो मुझे इस नेताओं पर और इन सुरक्षा बलों और ख़ुफ़िया तंत्र पर गुस्सा नहीं आता अब तो बस एक प्रश्न आता है की हमारे देश की जनता क्या अंधी हो गयी है या इस बार पूरे देश के पानी में भांग घुल गयी है ? विस्फोट होने के १२ घंटे बाद ही सब कुछ सामान्य हो गया !! लोग मुम्बई के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं मुझे इस जज्बे पर ही गुस्सा आ रहा है क्या सब लोग अपनी बारी आने तक इस सब की उपेक्षा ही करते रहेंगे ??



    शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित नयी कानूनी रचनाये ...

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  6. अंकित भाई, आपका गुस्सा जायज़ है|
    पता नहीं क्यों हम भारतवासी एडजस्ट करना सीख गए हैं? क्यों हम लड़ना भूल गए? क्यों हम विरोध करना भूल गए|
    आपने सही कहा कि अपनी बारी आने तक इस सब की उपेक्षा ही करते रहेंगे|
    इसीलिए मैंने पोस्ट की अंतिम पंक्ति मे भी लिखा है कि "अब भी यदि भारतवासी भोंदू युवराज को भारत के अगले प्रधानमन्त्री के रूप में देख रहे हैं, तो ये बम धमाकों में ही मरने लायक हैं|
    यदि किसी ने आत्महत्या करने की ठान ही ली है तो उसे तो भगवन शिव भी नहीं बचा सकते|"

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  7. ख़ुफ़िया तंत्र तो कहीं और ही व्यस्त रहता है. आपकी तीनो सम्भावनाये पढ़ी और तीनो ही इस निकम्मी सरकार और खुफिया तंत्र पर सटीक बैठती है. हमेशा की तरह धारदार प्रस्तुति .

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  8. मुम्बई हमले हमारी कायरता और नेताओं के नकारेपन को दिखातें है, लोकतंत्र में हम सब भी दोषी हैं,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  9. Sabhi ko pata hai ki khufiya tantra to assam or Kerla Mai dharmantran kara raha hai, toh phir mumbai mai kanha se pata lageyega ki bomb kanha phatega, waise sabse jyada toh digvijay ko hi pata hota hai, usko pehle hi call jo aa jati hai, usko bata dena chahiye tha bechare kuch log toh bacha liye jate.

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  10. देखिये दिग्गी कुत्ते ने भोंकना शुरू किया संघ और हिन्दुओं का हाथ है..
    दिनोदिन इस कुत्ते के प्रति मेरी घृणा बढती ही जा रही है...
    ये राहुल तो यही चाहता है रोज बम फूटे ..भारत इराक अफगान बन जाये और अमेरिका की सेना यहाँ आ कर कब्ज़ा करे..और ये गद्दार देश को बेचकर दलाली खाए..
    मनमोहन को अब नामर्द कहा जा सकता है ...हरकते वैसी ही कर रहा है..

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  11. जिस व्यक्ति को देश अपने भावी प्रधान मंत्री के रूप में देखता है, उसकी न केवल सोच नकारात्मक है, बल्कि उसके लिए भारत और इराक, अफगानिस्तान में कोई अंतर नहीं है |

    इनसे देश क्या उम्मीद करे, जो केवल हर मुद्दे को राजनीतिक लाभ की नज़र से देखता है, जिसे उत्तर प्रदेश में किसानो का लाठी चार्ज तो दीखता है पर रामलीला मैदान पर हुए अत्याचार दिखयी नहीं देते, जो काला धन नहीं दिखाई देता,
    देखिये फिर से दिग्गी राजा अपने बिल से बाहर निकल आया है अभी अभी उसका बयान आया है की इस घटना में संघ का भी हाथ हो सकता है |

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  12. दिग्विजय सिंह जी से ऐसे ही बयान की उम्मीद थी | इसके अलावा वे और किस्म का बयान दे ही नहीं सकते |
    हिंदू संगठनों से ना जाने क्यों इतनी नफ़रत है उन्हें | उन्हें हर विशफोट में हिंदू संगठन ही शामिल दिखते हैं |
    ना जाने क्यों उनकी सोच एकतरफ़ा है ?
    आपके पोस्ट का अनुसरण करने के बाद भी आप के नए पोस्ट हमारे डैश बोर्ड पर क्यों नहीं आ रहे हैं |
    ये आपने क्या कर दिया है मेरे भाई | मैं तो कंप्यूटर के मामले में अनाड़ी हूँ |
    आप के पास कोई हल हो तो बताएं !

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  13. आदरणीय मदन शर्मा जी, मैंने अपने ब्लॉग के लिए Domain खरीद लिया है| पहले इसका लिंक pndiwasgaur.blogspot.com था, जो अब www.diwasgaur.com हो गया है|
    अत: आपको Notification नहीं मिल रहा है| आप मेरे ब्लॉग को unfollow कर पुन: follow करें| इसके लिए आप मेरे ब्लॉग पर followers की list के नीचे sign in पर जाकर click करें| इसके बाद आप मेरे ब्लॉग पर sign in करें| sign in करने के बाद आपका नाम followers की list से भी ऊपर आएगा| आपकी तस्वीर के नीचे विकल्प लिखा होगा| उस पर click करें| एक नयी window खुलेगी, जिसके दाई तरफ एक स्थान पर लिखा होगा "इस ब्लॉग का अनुसरण करना बंद करें" अथवा "stop following this blog". उस पर click करें|
    अब आप मेरे ब्लॉग को unfollow कर चुके होंगे| इसके बाद पुन: follow करें| अब आपको मेरी नयी पोस्ट के notification मिल जाएंगे|
    धन्यवाद...

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  14. भारत में ख़ुफ़िया तंत्र राजनैतिक प्रतिद्वंधियों को प्रताडित करने के लिए ही है।

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  15. हमें ज़रुरत है - एक आन्दोलन की - और हम या तो अपनी लाइफ स्टाइल से इतने अभ्यस्त हो चुके हैं - या इतने आलसी - कि हम हिलना ही नहीं चाहते | यदि एक आदमी आन्दोलन करता है - तो सरकार आधी रात को आंसूं गैस के गोले और लाठियां बरसाती है - उसे ढोंगी कहती है और तरह तरह के इलज़ाम लगाती है | और हम फिर से आँख बंद कर के सब भूल कर सो जाते हैं - और अगले इलेक्शन में फिर उसी सरकार को वोट दे कर जिताते हैं | क्या हम कोशिश करते हैं - कि कम से कम अपने घर और आसपास के घरों में जो अनपढ़ लोग काम कर रहे हैं - जो अभी भी आँख बंद कर के "इंदिरा गांधी" को वोट दे रहे हैं -- उन्हें समझाने की कि तुम लोगों को मूर्ख बना कर ये लोग वोट बैंक बनाए हैं - और क्या क्या कर रहे हैं ?

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