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Sunday, October 17, 2010

आज़ाद भारत???

मित्रों मुझे तो अभी शंका ही है कि भारत आज़ाद है| क्यों कि भारत आज़ाद होता तो यहाँ किसी विदेशी के आने पर उससे पासपोर्ट और वीजा माँगा जाना चाहिए, किन्तु १९९७ में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबैथ के भारत आने पर पासपोर्ट नहीं लगा था वह बिना पासपोर्ट के भारत आई थी| १९४७ से पहले जब कोई ब्रीटिश अधिकारी या महारानी का भारत आना होता था तब उनसे पासपोर्ट पूछने वाला कोई नहीं था क्यों कि उस समय भारत इंग्लैण्ड का एक उपनिवेश था| किन्तु आज तो हम शायद भारत को आज़ाद कहते हैं न?
मित्रों आपको पता होगा कि आज के समय में जब चुनाव के बाद कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आती है तो शपथ ग्रहण समारोह के बाद नया प्रधान मंत्री एक कागज़ पर हस्ताक्षर करता है जिसे सत्ता का हस्तांतरण कहते हैं, और उस पर हस्ताक्षर करने के बाद पुरानी पार्टी को देश निकाला नहीं दिया जाता, उसे भी भारत में सामान अधिकार के साथ जीने का हक़ दिया जाता है क्यों कि उस पार्टी के नेता भी भारत के संविधान में भारत के नागरिक हैं, अत: जो अधिकार एक साधारण भारतीय के हैं वे पुरानी पार्टी के नेता के भी हैं क्यों कि हम आज़ाद हैं| मित्रों १९४७ में भी नेहरु ने उसी कागज़ (सत्ता का हस्तांतरण) पर हस्ताक्षर किया था और हमें यह बताया गया था कि अब हम अंग्रेजों से आज़ाद हो गए हैं तो अब महारानी को यह विशेषाधिकार क्यों दिया गया? मतलब महारानी आज भी भारत की नागरिक है, कौनसे क़ानून के अनुसार? १८९७ के Indian Citizenship Act के अनुसार| यह बात आपको लेख में कहीं समझ आ जाएगी|
१९४६ में अंगेजों ने भारत को आज़ाद करने से पहले एक क़ानून बनाया था जिसका नाम है Indian independence Act. मित्रों आप में से कूछ राष्ट्रवादी यह बात जानते होंगे कि भारत और पाकिस्तान का विभाज़न हिन्दू या मुसलामानों की तरफ से नहीं अंग्रेजों की तरफ से हुआ था| अंग्रेजों द्वारा बनाए गए Indian independence Act में दो बातें हैं जो मै आपके सामने रखना चाहता हूँ|
1. Two independent dominions India and Pakistan shall be set up in India.
2. Both dominions will be completely self governing in their internal affairs, foreign affairs and national security, but the British monarch will continue to be their head of state represented by the Governor General of India and a new Governor General of Pakistan.
मित्रों सबसे ज्यादा आपतिजनक ये दो बिंदु हैं, जिनमे साफ़ साफ़ लिखा है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भारत और पाकिस्तान दो Dominion States होंगे| मित्रों Dominion States का अर्थ कहीं से भी पता कर लो इसका अर्थ होता है एक बड़े राज्य के अधीन छोटे राज्य| अर्थात भारत और पाकिस्तान आज भी ब्रिटेन के Dominion States हैं न कि Independent Nations. मित्रों Indian independence Act बाज़ार में शायद दस रुपये का मिलता है आप चाहें तो उसे खरीद कर पढ़ सकते हैं| पूरा क़ानून न भी पढ़ें केवल उसकी प्रस्तावना पढ़ लें आपको पता चल जाएगा कि क्यों ब्रिटेन की महारानी का नाम भारत के राष्ट्रपति से ऊपर लिखा जाता है? और आप में से शायद कुछ यह जानते होंगे कि आज भी Comman Wealth Contries में भारत और पाकिस्तान का नाम as a British Dominion States के रूप में लिखा हुआ है न कि as a Indian and Pakistan Republic, मतलब हम आज भी महारानी के  Dominion States हैं| कहीं उसी क़ानून के अनुसार तो महारानी भारत में बिना पासपोर्ट के तो नहीं आई थी?
मित्रों यह एक बहुत ही गंभीर प्रश्न है जिसे आज़ादी से पहले ही नेहरु द्वारा उठाया जाना चाहिए था किन्तु नेहरु ने तो इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिया| क्यों कि नेहरु एक सत्ता का भूखा आदमी था जो बड़ी ही चालाकी से भारत का प्रधान मंत्री बना| उसकी चालाकी के सम्बन्ध में मै आपको कुछ बताना चाहता हूँ| मित्रों आज़ादी से पहले Congress Working Committee की एक बैठक हुई थी जिसमे यह निर्णय लिया गया था कि नेहरु और सरदार पटेल के नाम पर कांग्रेस के सभी प्रदेश अध्यक्षों द्वारा चुनाव होगा और जिसके पक्ष में सबसे अधिक वोट पड़ेंगे वही कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद संभालेगा और वही आज़ाद भारत का पहला प्रधान मंत्री होगा| उस समय भारत में कांग्रेस के १५ प्रदेश अध्यक्ष थे जिनमे से १४ ने सरदार पटेल के समर्थन में अपना मत दिया था केवल एक मत नेहरु के पक्ष में था| क्यों कि कांग्रेस में नेहरु को पसंद नहीं किया जाता था, और पसंद इसलिए नहीं किया जाता था क्यों कि नेहरु चरस पीता था, नेहरु सिगरेट पीता था, नेहरु एक ऐयाश व्यक्ति था, नेहरु एक चरित्रहीन व्यक्ति था| माउंट बैटन की पत्नी से उसके सम्बन्ध छिपे नहीं हैं| आप चित्र देख सकते हैं|

तो मित्रों Congress Working Committee के निर्णय के आधार पर सरदार पटेल जीत गए और नेहरु हार गया| और इसी निर्णय के आधार पर सरदार पटेल को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना तय हुआ और आज़ाद भारत का पहला प्रधान मंत्री भी सरदार पटेल को बनाना तय हुआ था| उस समय नेहरु की गद्दारी की एक घटना मै आपके सामने रखना चाहता हूँ| जिस व्यक्ति को हम जीवन भर चाचा नेहरु कहते रहे उसकी गद्दारी मुझे भी नहीं पता थी|
मित्रों जैसा कि आप ने अभी पढ़ा कि कांग्रेस में नेहरु को कोई पसंद नहीं करता था किन्तु नेहरु को पसंद करने वालों में सबसे ऊपर थे अंग्रेज़ और उन्ही अंग्रेजों का नुमाइंदा माउंट बैटन| माउंट बैटन को भारत भेजने का मुख्य कारण ही यह था कि अंग्रेज़ नेहरु को फाँसना चाहते थे और यह काम किया माउंट बैटन और उसकी पत्नी ने| नेहरु कोई जन नेता नहीं था उसे तो अंग्रेजों ने मीडिया द्वारा प्रचारित किया और उसकी उज्वल छवि बनानी चाहि क्यों कि सभी अंग्रेज़ नेहरु के बारे में कहा करते थे कि यह आदमी शरीर से भारतीय है किन्तु इसकी आत्मा बिल्कुल अंग्रेज़ है, अंग्रेज़ भारत छोड़ भी दें तो नेहरु अंग्रेजों का शासन और उनके क़ानून भारत में चलाता रहेगा और भारत हमेशा के लिये British Domenion  State बनकर रहेगा| चुनाव हारने के बाद जब नेहरु को लगा कि अब मेरी दाल नहीं गलने वाली तो वह गांधी जी के पास गया और उन्हें धमकाया कि अगर मै प्रधान मंत्री नहीं बना तो मै कांग्रेस में फूट दाल दूंगा| और उस समय गांधी जी शायद अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की| क्यों कि गांधी जी को लगा कि अगर कांग्रेस में फूट पड़ी तो अंग्रेजों को भारत ना छोड़ने का एक बहाना मिल जाएगा कि हम किस कांग्रेस के हाथ में सत्ता सौंपें, नेहरु वाली या सरदार पटेल वाली?  और इसी कारण गांधी जी ने अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की और सरदार पटेल को एक पत्र लिखा और उसमे गांधी जी ने पटेल से अपना नाम प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार से वापस लेने की प्रार्थना की| और यह पत्र आप चाहें तो देख सकते हैं| गांधी वांग्मय के सौ अंक हैं जो भारत सरकार ने छापे और इनमे से अंतिम कुछ अंकों के आधार पर गांधी जी के सचीव कहे जाने वाले प्यारे मोहन ने एक किताब लिखी जिसका नाम है पूर्ण आहूति| इस किताब में गांधी जी का यह पत्र भी है|
पत्र पढने के बाद सरदार पटेल खुद गांधी जी के पास गए और उनसे कहा कि "बापू अगर आपकी अंतरात्मा कहती है तो मै तो आपका सेवक हूँ और यह पद मै नेहरु के लिये छोड़ सकता हूँ|" और सरदार पटेल ने दरियादिली दिखाते हुए आज़ाद भारत का पहला प्रधान मंत्री बनने का सौभाग्य छोड़ दिया और उसे हथिया लिया नेहरु ने| और उसी के बाद भारत पाकिस्तान के विभाज़न की बात सामने आई है, सरदार पटेल यदि प्रधान मंत्री होते तो ऐसा कभी नहीं होने देते क्यों कि भारत की छोटी छोटी रियासतों को एक करने का काम पटेल ने ही किया था और कश्मीर का विलय भी भारत में पटेल ने ही किया किन्तु नेहरु ने वहां भी टांग अडाई और कश्मीर में धारा ३७० लागू नहीं हुई| और उसी के कारण आज आधा कश्मीर पाकिस्तान के कब्ज़े में है, लद्दाख का कुछ भाग और तिब्बत आज चीन के कब्ज़े में है|
और मित्रों आपमें से कूछ यह भी जानते होंगे कि कांग्रेस पार्टी एक अंग्रेज़ द्वारा ही बनाई गयी थी|
सन १८८५ में मुंबई (उस समय बम्बई) में गोकुल दास तेजपाल भवन में Allan Octavian Hume द्वारा कांग्रेस पार्टी की स्थापना हुई थी| और यह पार्टी एक मनोरंजन क्लब के रूप में स्थापित की गयी थी| अंग्रेज कांग्रेस के बारे में कहा करते थे कि इस क्लब में हम उन भारतीयों को जमा करेंगे जिनके मन में कूछ बलबला है अर्थात देश को आज़ाद करवाने की इच्छा है, ताकि वह बलबला फूट कर कांग्रेस पार्टी में ही बाहर आ जाए, बाहर न जाने पाए| और इसीलिए अंग्रेज़ कांग्रेस को सेफ्टी वॉल्व कहा करते थे| वो तो सौभाग्य था देश का जो गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत आये| उनसे पहले तो कोई जानता तक नहीं था कि कांग्रेस जैसी कोई चीज़ भारत में है, गांधी जी ने इसमें प्राण फूंके, गांधी जी ने अन्न्ग्रेजों द्वारा बनाए गए इस क्लब को जन आन्दोलन का रूप दिया और बाद में खुद गांधी जी ने ही इस पार्टी से किनारा कर लिया, उन्होंने आजीवन कांग्रेस पार्टी का त्याग कर दिया| गांधी जी कांग्रेस पार्टी के सदस्य ही नहीं रहे थे| और अंतिम क्षणों में गांधी जी ने यहाँ तक कह डाला था कि इस कांग्रस को खत्म कर दो नहीं तो यह पार्टी देश को ऐसे ही लूटेगी जैसे कि अंग्रेजों ने लूटा है, क्यों कि गांधी जी नेहरु जैसों की नीयत भांप चुके थे| मित्रों गांधी जी की यह भविष्यवाणी भी सत्य सिद्ध हुई, घोटालों के रिकॉर्ड इस पार्टी ने पिछले ६३ वर्षों में कायम किये और ताज़ा तरीन मामला आप राष्ट्र मंडल खेलों का भी ले सकते हैं| नेहरु ने कांग्रेस को अपने बाप की जागीर बना डाला और इसी की संतानों ने देश को| वरना क्या वजह थी कि कांग्रेस पार्टी को प्रधान मंत्री के पद के लिये अपने घर के बाहर उम्मीदवार ही नहीं मिले| और जो मिले उन्हें खुद कांग्रेस ने ही ख़त्म कर डाला| लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण आप देख सकते हैं| क्यों कि इनकी जड़ तो नेहरु ही था|
और आप जानते होंगे कि १४ अगस्त १९४७ की रात गांधी जी दिल्ली ही नहीं आये, वे नोआखाली में थे| कांग्रेस के बड़े बड़े नेता गांधी जी को बुलाने गए किन्तु उन्होंने मन कर दिया और कहा कि मै मानता नहीं कि आज़ादी जैसी कोई चीज़ इस देश में आ रही है| यह केवल सत्ता के हस्तांतरण का सौदा हुआ है| गांधी जी ने नोआखाली से ही एक Press Statement दिया था जो कि पूर्ण आहुति में छपा भी था कि "यह जो कथित आज़ादी आ रही है यह हमारा लक्ष्य नहीं था, यह आज़ादी मै नहीं चाहता था, ये तो सत्ता के लालची लोग ले कर आये हैं|" वरना क्या कारण था कि भारत की आज़ादी की क्रांति का सबसे बड़ा पुरोधा ही आज़ादी के जश्न में शामिल नहीं हुआ? क्यों कि सत्ता के हस्तांतरण पर नेहरु ने हस्ताक्षर किया था और भारत को एक British Domenion State बना डाला था| माउन्ट बैटन ने अपनी सत्ता नेहरु को सौंपी थी और हमें समझाया गया कि स्वराज आ गया है, किन्तु यह स्वराज नहीं था और शायद यही समझाने महारानी का भारत में आगमन बिना पासपोर्ट और वीजा के हुआ कि तुम अभी भी मेरे गुलाम ही हो|

21 comments:

  1. maine abh tak ye article padha t nai hai lekin photos se hi sab pata chal raha hai. Ye cigratte wali to Nationall level pe bhejni chahiye , iske sath rahul gandhi wali mil jaye to maza aa jaye.

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  2. ab maine padh liya hai. Aisa lagta hai Nehru ke ghotale to zindagi bahr ujagar karte raho to bhi khatm nahi honge.

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  3. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  4. .

    पूरा लेख पढ़कर बहुत दुःख हुआ। अच्छा हुआ जो आपने हमें इस हकीकत से रूबरू कराया । काश बापू उस दिन मजबूर नहीं होते। काश सरदार पटेल ही हमारे पहले प्रधान मंत्री होते, तो हम सही मायनों में आजाद होते।

    आप सही कह रहे हैं, हम आजाद नहीं हैं।

    बिलकुल नहीं हैं।

    .

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  5. बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख है. काफी कुछ जानने का मौका मिला. कृपया इसी तरह लिखते रहिये........

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  6. प्रिय बंधुवर
    नमस्कार !
    चित्र देख कर और आलेख पढ़ कर हर ईमानदार , चरित्रवान और तटस्थ भारतीय के मुंह से स्वतः यही निकलेगा -
    धिक्कार है ! धिक्कार है !!
    नेहरू अस्वीकार है !!!



    निरंतर ऐसी प्रामाणिक एवं तथ्यपरक सामग्री यहां प्रस्तुत करते रहें ।

    साधुवाद !


    मंगलकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  7. jabardast,jandar,shandar,damdar.narayan narayan

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  8. कुछ तो मैं भी जानता था
    और कुछ तुमने सुना दी.
    आपकी भाषा की गरमी
    जागृति की है मुनादी.

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  9. wonderful information and great photo

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  10. प्रिय मित्रों आप सभी ने मेरा यह ब्लॉग पढ़ा और प्रयासों की सराहना की, इस उत्साह वर्धन के लिये आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद| आशा है कि मेरे आने वाले लेख भी इसी प्रकार आपको पसंद आयें| यह तो एक प्रयास है, हमारा तो काम ही जागना और जगाना है| हम सब राष्ट्र भक्त एक हो जाएँ तो हम देश को सच्चा स्वराज दिला सकते हैं|

    बहुत बहुत धन्यवाद|

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  11. इस सुंदर नए से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  12. सनसनीखेज आलेख। लेडी माऊण्टबेटन के साथ नेहरू के चित्र तो हैरत में डालने वाली हैं। कृपया अपने नये आलेखों से अवगत कराते रहें।

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  13. India Independence Act के बारे में जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ. यह तो धोखा है. आजादी के नाम पर इसे कैसे कुबूल कर लिया गया.

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  14. Good said but................................
    koi bhi desh perfect nahi hota use perfect banana padta hai

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  15. दिवस जी बढिया लिख बस एक संशोधन - उस समय १५ नही १८ प्रदेश अध्यक्ष थे जिसमे से १५ ने सरदार का समर्थन किया था बाकी ३, नही नेहरु नही, कृपलानी जी उनकी पसंद थे। रही बात गांधी जी के नेहरु के धमकी के सामने झुकने की तो यह मुझे सही नही लगता है, गांधी नेहरु से अत्यधिक प्रभावित थे नही तो जो गांधी सुभाष बाबू के समय विभाजन से नही डरा तो जब कि यह निश्चित रूप से स्पष्ट था कि आजादी तो अंगेजों को देना ही पडेगा ऐसे मे वो कैसे डर गया? फिर भी मेरे पास कोई प्रमाण नही मात्र आम्कलन है मेरा यह।

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  16. प्रवकता.कॉम पर एक लेख पर अपनी टिप्पणी लिखने हेतु मैंने शोध कार्य में लीन इस ब्लॉग पर आ यह लेख को पढ़ने का अवसर प्राप्त किया है| मुझे अपनी अधेड़ ऊमर में यह विश्वास हो चला है कि वास्तव में थॉमस बैबिंगटन मैकॉले के एक ही भारतीय सपूत जवाहरलाल नेहरु ने रक्त और रंग में भारतीय होते अंग्रेजी सोच, नैतिकता, और बुद्धि से अंग्रेजों के प्रतिनिधी कार्यवाहक के रूप में स्वतंत्रता के प्रारंभ से ही बिना किसी विरोध के सत्तारूढ़ी कांग्रेस द्वारा भारतीय स्वशासन स्थापित कर भारतीयों से ऐसे ऐसे राजनीतिक दाव पेंच खेले हैं कि हम आज भी स्वेच्छापूर्ण गुलामी में लुटे जा रहे है| मैं चाहूंगा कि मेरे जीवन काल में नेहरु और कांग्रेस के नाम भारत इतिहास से हमेशा के लिए मिट जाएं| जहां तक भारत के Dominion of India होने की बात है, ऐसा केवल अगस्त १५, १९४७ से लेकर जनवरी २६, १९५० तक ही था जिसके उपरान्त भारत के नए संविधान के अनुसार देश भारत गणतंत्र अथवा Republic of India कहलाता है|

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    1. आपके व्दारा सही तथ्य से अवगत कराने के लिए सादर धन्यवाद

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  17. mene abhi tak suna thaa lekin aaj muje vishwaas
    hogaya ji jo mene bachpan me suna thaa wo thik hi thaa
    is baat ko poore desh ko pataa chalna chahiye

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  18. yadi hame sachchi azaadi chahiye to is congress sarkaar ko jitana nahi hai aur naa hi is parivaar ke kisi sadasya ko desh ka neta banne denaa chaahiye

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  19. बहुत अच्छी तरह से लिखा गया है पड़ते हुए जोश आ गया जो लोग ये बात जानते है उन्हे सांप्रदायिक कह के अलग कर दिया जाता है हिय और चोर लुटेरे देश चला रहे है

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