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Sunday, December 18, 2011

Come on HINDUS, Lets Enjoy...CHEERS

आओ हिन्दुओं जश्न मनाएं| इससे ज्यादा हम कर भी क्या सकते हैं?
देखिये अभी हफ्ते बाद क्रिसमस आने वाला है| पता नहीं कितने ही मुर्ख बधाइयां देने आएँगे| फिर हफ्ते बाद नया(?) साल| इस बार मूर्खों की तादात और भी बढ़ जाएगी| शाम को मैक डोनाल्ड, पिज्जा हट, रात भर डिस्को-पार्टी, मस्ती, बीयर, सिगरेट, बाइक्स, रॉक म्यूजिक के साथ साथ HAPPY NEW YEAR का उद्घोष, और भी पता नहीं क्या क्या...
अंग्रेजों ने आधी दुनिया पर राज किया था, किन्तु गुलामी का सबसे ज्यादा असर हम भारतीयों पर ही हुआ है| अंग्रेज़ बनने की होड़ मची है| अँगरेज़ तो सोच रहे होंगे की फालतू ही दो सौ सालों तक अपने घर से दूर झक मारी| यदि मैकॉले पहले ही पैदा हो गया होता तो अंग्रेज़ इंग्लैण्ड में बैठकर ही हिन्दुस्तान चलाते|

हमारे आदरणीय(?), पूजनीय(?), सम्मानीय(?) प्रधानमन्त्री श्री(?) श्री(?)......100000000......8 मनमौनी सिंह का रूस दौरा हुआ| क्यों हुआ वो बाद में|
पहले तो उनके रूसी दौरे के दो दिन बाद ही इस्कॉन के संस्थापक "ए सी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद" द्वारा रचित "भगवत गीता एज इट इज" को रूस में प्रतिबंधित कर देने की तैयारी हो रही है| कल सोमवार तक अदालत का अंतिम निर्णय भी आ जाएगा| रूसियों का देश है, वो चाहे जो कर सकते हैं| किन्तु उनका यह कहना कि "गीता एक उग्रवाद को बढ़ावा देने वाली किताब है जिससे केवल कलह-कलेश फैलता है", अनुचित है और सहन करने लायक नहीं है| उसपर मनमौनी का यह कहना कि हम रूस के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं, आग में घासलेट डालने का काम करता है| उनसे इससे अधिक अब कोई अपेक्षा भी नहीं रह गयी| निंदा ही करनी है तो वह तो मैं भी कर सकता हूँ, फिर मुझे ही प्रधानमंत्री बना दो| शायद निंदा से ऊपर उठकर कुछ तो कर ही लेंगे|
खैर यहाँ किसी को खबर नहीं है| इस साल के जून से ही रूस में भगवत गीता पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए कार्यवाही चल रही है| मॉस्को के 15000 हिन्दुओं व कई इस्कॉन अनुयायियों ने भारत के प्रधानमंत्री की रूस यात्रा को देखते हुए उनसे गुहार लगाईं थी कि वे गीता पर प्रतिबन्ध को रोकने के लिए कोई कूटनीतिक प्रयास करें| अब क्या कूटनीतिक प्रयास हो सकते थे वो भी बाद में|
पहले तो ये कि जब पिछले साल अमरीका के एक पादरी फादर जॉन्स ने 9/11 को "कुरआन बर्न डे" ही कह दिया था, तब दुनिया के सभी सत्तर इस्लामी मुल्कों में आग लग गयी थी| बारिश कहीं हो रही थी और छतरियां कहीं और खुल गयी थी| खैर ये भी उन मुल्कों का एक सकारात्मक कदम था| कम से कम अपने धर्म ग्रंथों के अपमान को सहन तो नहीं करते|
हिन्दुओं के वश में ऐसा कुछ नहीं है| कुछ हिन्दू तो ये स्यापा पा रहे हैं कि रूसियों का देश है, वे जो चाहे कर सकते हैं| हम क्यों चिंता करें? कुछ का तो यह भी कहना है कि जब 85 प्रतिशत हिन्दू गीता पढना तो दूर उसे खरीदते तक नहीं हैं तो हम क्यों चिंता करें गीता की|
कम से कम ऐसे ठन्डे (सेक्युलर और शांतिप्रिय) हिन्दुओं को तो गीता अवश्य ही पढनी चाहिए| यदि गीता पढी होती तो गीता के इस अपमान पर महाभारत अवश्य हो जाता|

खैर इन मूर्खों पर ध्यान देने से अच्छा है, पहले ये जाने कि मनमौनी का रूस दौरा क्यों हुआ था?
दरअसल मनमोहन सिंह ने रूस के साथ एक रक्षा समझौता किया था| जिसके लिए वे रूस से 20 हज़ार करोड़ की लागत से 42 सुखोई विमान खरीदने गए थे| रूस की अर्थव्यवस्था भारत जैसे देशों को अपने हथियार बेचने से चलती है| चाहे जंगी जहाज गोबोंचोव हो या मिग और सुखोई जैसे विमान| अमरीका और रूस जैसे देशों का धंधा ही यह है| यहीं से मनमोहन कुछ कूटनीतिक प्रयास कर सकते थे, जिनकी चर्चा ऊपर की गयी है| इस रक्षा समझौते के चलते अपने नाक, आँख, कान, हाथ, टांग सब ऊपर रखे जा सकते थे| किन्तु मनमौनी के लिए इतनी दलेरी संभव नहीं|
अब कुछों के मन में प्रश्न आ सकता है कि ये विमान रूस से नहीं खरीदते तो कहाँ से आते? किसी से लेने की कोई ज़रूरत ही नहीं है| एक ओर तो भारतीय वैज्ञानिक अग्नि, पृथ्वी, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बना लेते हैं, वहीँ दूसरी ओर टुच्चे टुच्चे विमान व जहाज बनाने में भारत असक्षम है| क्या ये बात मानने में आती है? चलो यह भी मान लिया कि ये सब भारत में नहीं बन सकता, तो भी 42 विमान खरीदने की क्या ज़रूरत है? एक खरीदो और बाकी 41 क्या 4100 उसकी देखा देखा बना लो| भाई नक़ल तो कर सकते हैं, अब इतना गया गुज़रा देश भी नहीं है हमारा| 2009 में जब एक अमरीकी लड़ाकू विमान को इंधन ख़त्म होने के कारण चीन में उतारना पडा तो आधिकारिक रूप से उसे छोड़ने के लिए चीन ने दस दिन लगा दिए| इन दस दिनों में चीन ने उस विमान की सारी जन्म कुंडली बना कर वैसे पचासों विमान खड़े कर दिए| जब चून्धी आँखों वाले चार फुटिए ऐसा कर सकते हैं तो हम तो उनसे कहीं बेहतर हैं न|

दूसरी घटना पाकिस्तान से आए 151 हिन्दुओं की है, जो भारत में ही यहाँ-वहां भटक रहे हैं| इन शरणार्थियों के लिए अब भारत में ही कोई जगह नहीं बची है| ये पाकिस्तान दुबारा जाना नहीं चाहते| क्योंकि वहां न केवल इनकी जान को खतरा है, बल्कि इनकी बहन-बेटियों की इज्ज़त भी खतरे में है| कईयों ने अपने स्वजनों व इज्ज़त को खोया है| किन्तु भारत में बांग्लादेश से आए 5-6 करोड़ मुसलमान शरणार्थियों के लिए तो जगह है किन्तु इन 151 हिन्दुओं के लिए नहीं| कभी दिल्ली में बैठी सरकार इन्हें भगा देती है तो कभी उत्तर प्रदेश की माया इन्हें नोएडा से फटकार कर निकाल देती है| कल शाम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा के एक मंदिर में शरणार्थी इन हिन्दुओं को जबरन बाहर निकाल कर एक हाइवे पर छोड़ दिया| कड़कती सर्दी में इनका क्या होगा, इसकी चिंता किसी को नहीं है| बांग्लादेशी मुसलामानों को तो सरकार राशन कार्ड व वोटर आई डी कार्ड देना चाहती है, जबकि इन हिन्दुओं के लिए सर छुपाने की जगह तक नहीं|

अंत में जाते-जाते एक अनुरोध - कृपया कोई हिन्दू मुझे MERRY CHRISTMAS अथवा HAPPY NEW YEAR जैसे शब्द न कहें| अन्यथा औपचारिकता के लिए SAME TO YOU भी नहीं कह सकूँगा|

14 comments:

  1. .

    प्रिय भाई दिवस, आपने एक बेहद ज़रूरी मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाया है ! सरदार जी की अकर्मण्यता तो आपके ब्लॉग पर आकर ही पता चलती है ! यदि कोई देश हमारे धर्म-ग्रंथों पर मूर्खतापूर्ण एवं अपमानजनक वक्तव्य देता है तो देश का प्रमुख होने के नाते प्रधान मंत्री को इसका विरोध करना चाहिए ! महा-प्रबुद्ध रूसियों को भागवद-गीता के बारे में सही अर्थों में समझाना चाहिए !

    भारतीय हों या फिर रूसी या अमेरिकन , हमारा जीवन तो एक संघर्ष है , जिसे जीने का सही ढंग समझाया गया है इस पवित्र ग्रन्थ में ! भागवद-गीता तो संसार का सबसे बड़ा 'दर्शन' है ! ये अल्पबुद्धि क्या समझेंगे भला इसकी महिमा !

    पकिस्तान से आये भारतीयों की दुर्दशा देखकर ह्रदय अति दुखित है ! हमारे देश के कर्ता धर्ता इस तरह बिक चुके हैं की इन्हें सही-गलत का ज्ञान ही नहीं रह गया है ! अपने ही देश में सौतेले व्यवहार से कितना दुखित होंगे ये लोग , यह समझा जा सकता है ! कितनी उम्मीद लेकर आये होंगे ये वापस !

    हमारा देश अच्छे इंजीनियर्स के दिमाग का भरपूर इस्तेमाल करना जानता ही नहीं ! उनके दिमाग को जंग लगा रहा है . भिखमंगों की तरह आयात करता है , जबकि निर्यात करने की क्षमता रखता है ! निज पर अभिमान करना आता ही नहीं है इन्हें !

    अंग्रेजों के बनाए दिवस की बधाई नहीं दूँगी ! न ही क्रिसमस, न ही न्यू ईयर ...बस आपके लिए अशेष शुभकामनाएं हैं ...आप जियें हज़ारों साल, साल के दिन हों पचास हज़ार !

    .

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  2. मुझे भी बड़ा दुःख हुआ था इस विषय में जानकर ....कभी कभी लगता है विश्व भर में एक पूरी योजना बनाई जा रही है हिन्दू धर्म को कटघरे में खड़ा करने की.....

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  3. मनमौनी सिंह तो गुरू ग्रन्‍थ साहिब के अपमान पर भी नहीं बोलेंगे। गीता तो दूर की बात है।

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  4. जब नाश मनुज का आता है,पहले विवेक मर जाता है..हिन्दू धर्म को ख़तम करने की वैश्विक कूटनीति में दलाल मनमोहन का स्थानीय स्तर पर उठाया गया कदम खान्ग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है..मगर इस सबसे इतर हिन्दुओं की आपसी फूट और सेकुलर बनने का वायरस इस समस्या को बढा रहा है..
    मेरे समझ से व्यक्तिगत रूप से हिन्दुओं को चारित्रिक और सामजिक उत्थान और गुलाम मानसिकता छोड़ना होगा तभी हम अपनी पहचान बनाये रख सकते है..


    अब एक प्रण मैंने भी आज लिया है..न तो हैप्पी क्रिसमस न ही न्यू इयर..
    आभार इस विषय को उठाने के लिए ...

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  5. मनमौनी जी से तो अब बोलने की उम्मीद रखना ही बेकार है ....
    गीता जैसे ग्रन्थ के लिए इस तरह की शिकायतें तो मन को आहत कर जाती है .साथ ही सवाल उठता है कि हम इसके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा सकते .........?,हम कोई -न -कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठा पाते हैं .......?,क्या हम इतने मजबूर हो गए हैं .............?

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  6. यूं ही थोड़े न गुलाम रहे सैकड़ों वर्षों तक. स्वाभिमान बचा ही कहाँ. हर चीज को नफे नुकसान के तराजू से देखने वालों के साथ यही तो होता है.

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  7. Very Nice post our team like it thanks for sharing

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  8. He is on mute mode

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  9. Bahut Hi Badhiya Diwas Ji. Man ko dukh hota hai ki desh ka pradhan mantri itna napunsak hai. Pata nahi kya hoga. Dhanywad.

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  10. AREY BHAI YE BAHART SWABHIMAN DIWAS HAI YA HINDU SWABHIMAN DIWAS.

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  11. आओ हिन्दुओं जश्न मनाएं..हफ्ते बाद क्रिसमस आने वाला है| फिर हफ्ते बाद नया साल;अंग्रेजों ने आधी दुनिया पर राज किया था, किन्तु गुलामी का सबसे ज्यादा असर हम हिन्दुओं पर ही हुआ है| 85 प्रतिशत हिन्दू गीता पढना तो दूर उसे खरीदते तक नहीं हैं क्योंकि गीता एक उग्रवाद को बढ़ावा देने वाली किताब है जिससे केवल कलह-कलेश फैलता है और सेक्युलर और शांतिप्रिय हिन्दुओं को तो गीता अवश्य ही नहीं पढनी चाहिए|
    अंत में जाते-जाते एक अनुरोध - कृपया मुझे MERRY CHRISTMAS और HAPPY NEW YEAR जैसे शब्द अवश्य कहें| CHRISTMAS और न्यू ईयर पर बस आपके लिए अशेष शुभकामनाएं हैं|

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  12. बेनामी, हिन्दू स्वाभिमान से इतना डर लगता है कि नाम बताने में भी जान निकल रही है...

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    1. भाई दिवस दिनेश जी आपने इतनी अच्छी जानकी दी इसके लिये मैं आपका हृदय से आभारी हूँ। मैं अपने सभी जानकार लोगों को इस अमूल्य जानकारी के बारे में बताऊंगा। जय हिन्द जय भारत

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    2. Durgesh Kumar ShrivastavaMarch 9, 2012 at 1:21 PM

      भाई दिवस दिनेश जी आपने इतनी अच्छी जानकी दी इसके लिये मैं आपका हृदय से आभारी हूँ। मैं अपने सभी जानकार लोगों को इस अमूल्य जानकारी के बारे में बताऊंगा। जय हिन्द जय भारत

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